Vidhwa Bhabhi Ki Chudai – चुदाई की तड़प बुझवाकर मानी सुनीता भाभी
हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम है अनिल और मैं बिहार के औरेया का रहने वाला हूँ. तथा आज मैं आपके साथ मेरे साथ गुजरी हुई एक सच्ची Vidhwa Bhabhi Ki Chudai कहानी लेकर आया हूँ. दोस्तों मेरी इस Vidhwa ki chudai कहानी में मैंने अपने पड़ोस की सबसे हॉट और सेक्सी भाभी सुनीता को अपने लंड का स्वाद दिया है.
अब दोस्तों आपको तो पता ही है भरी जवानी में किसी का पार्टनर मर जाए तो उस पर क्या बीतती होगी? और ऐसा ही मेरी सुनीता भाभी के साथ हुआ क्योंकि आज से 1.5 बरस पहले मेरे पड़ोस के भैया जो की सुनीता भाभी के पति थे उनका कार एक्सीडेंट की वजह से निधन हो गया था. और तभी से दोस्तों सुनीता भाभी की तो मानों चेहरे की मुस्कान ही गायब हो गयी है.
क्योंकि मैं पहले देखता था सुनीता भाभी काफी मुस्कुराती और हंसती थी. लेकिन अब ना तो वो किसी के घर जाती है और ना किसी से ज्यादा बकचोदी करती है. पुरे दिन भर वह अपने आप को बीजी रखने की कोशिश में लगी रहती है. और इसी चक्कर में दोस्तों वह आज के इस दौर में चुदाई के लिए इतनी प्यासी हो गयी है की बूझो मत.
दरअसल दोस्तों अभी गर्मियों की छुट्टियों के दौरान हम पड़ोस के सभी लड़के क्रिकेट खेल रहे थे. इसी दौरान पास के घर यानी सुनीता भाभी के घर पर गेंद चली गयी. क्योंकि आजकल वो दीमाग खराब रखती थी इसलिए हर किसी से लड़ाई करने लग जाती थी. लेकिन दोस्तों फिर सबने फैसला किया की वो मेरे को भेजेंगे सुनीता भाभी के घर गेंद लाने के लिए.
अब मैं वहां पर डरता-डरता हुआ गेंद लेने के लिए पहुँच गया. और इस दौरान सुनीता भाभी के घर पर कोई नही था. यहाँ तक की उनकी सासु माँ भी बाजार गयी हुई थी. तथा आस औलाद उनके पहले से ही नही थी. इसलिए वहां पर कोई नही था सिवाय सुनिया भाभी के. और सबसे जरूरी बात ये की उनके घर वैसे भी कोई आता जाता नही था.
क्योंकि ये तो हम भी समझते है की विधवा औरत के घर कम ही लोग आते जाते है. लेकिन दोस्तों मेरा तो वहां जाना एक मजबूर सा था. इसलिए मैंने वहां पर जाने का फैसला करके उनके घर का मेन गेट खोल दिया. तथा वहां का नजारा मैंने देखा तो मैं एकदम से दंग रह गया. क्योंकि इस दौरान सुनीता चाची घर में ही नहा रही थी. और इस दौरान वह जोर-जोर से अपनी चूत में पानी डाल डालकर ऊँगली करें जा रही थी. तथा लम्बी-लम्बी सांसे लिए जा रही थी.
अब मैंने जैसे ही उनको देखा तो मैं एकदम से डर सा गया. क्योंकि दोस्तों मैं ठहरा अभी एक बच्चा 19 बरस का. हालाँकि मेरे को इस दौरान चुदाई का तो पूरा ज्ञान मिल चूका था. लेकिन कभी मैंने इस प्रकार तडपती हुई मछली को नही देखा था. फिर मुझे समझ आया की शायद ये भाई के निधन के बाद से ही ऊँगली से काम चला रही है.
इसलिए अब मैं दबे पाँव पास में पड़ी गेंद उठाने लगा और इतने में ही सुनीता भाभी को पता चल गया. और उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तथा जोर से चिल्लाई…. तुम यहाँ किसे पूछकर आये….. तुम्हरा खेलना इतना जरुरी है क्या? ऐसे शब्द मेरे को सुनाने लगी.
तो मैंने भी कहा- सॉरी भाभी, सभी लोग डर रहे थे इसलिए उन्होंने मेरे को गेंद लेने के लिए आपके घर भेज दिया. मेरे से बहुत बड़ी गलती हो गयी. प्लीज मेरे को माफ़ कर दो…. प्लीज भाभी….. अब नही आऊंगा.
इस दौरान दोस्तों भाभी एकदम नंगी हो रखी थी. तो मेरी नजरें भी उनकी चूत और उनके 38 के तने हुए बूब्स पर पड़ रही थी. तथा मेरा मन अब उनको और निहारने का होने लगा था. इसलिए भाभी मेरे को शब्द पर शब्द सुनाये जा रही थी. तथा मैं उनके शब्दों को अनसुना करके उनको निहार रहा था. तथा मेरी इस हरकत से भाभी भी समझ चुकी थी की मैं उसको चोदने के लिए ऐसा कर रहा हूँ.
क्योंकि सुनीता भाभी एक सेक्सी लड़की थी इसलिए इतना सब समझना तो उनके लिए मामूली सा काम था. इसलिए अब उन्होंने बोला- तुम एक बार ये गेंद पकड़ाकर वापस आओ मेरे पास.
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इतना सुनते ही दोस्तों मैं दौड़ा-दौड़ा गया गेंद पकड़ाने. और इसके बाद मैंने अपने दोस्तों को गेंद दे दी तथा मैं भाभी के घर वापस जाने लगा तो दोस्त बोले- वापस कहाँ जा रहे हो?
मैं बहाना बनाकर बोला- कोई काम है भाभी को घर पर इसलिए जा रहा हूँ.
इतना कहकर मैं सुनीता भाभी के पास चला आया. और मेरे को आते ही इस दौरान भाभी ने अपने कपड़े डाल लिए थे. तथा वो मेरे से बोली- तुमने कुछ देखा तो नही?
मैं बोला- देखा ना भाभी आप बिना कपड़ों के थी… वो मेरे दिमाग में घूम रहा है आपका नंगा बदन.
भाभी- इसके अलावा तो तुमने कुछ नही देखा ना?
मैं- सच बताऊ?
भाभी- हाँ तो सच ही बताओ.
मैं- आपको ऊँगली करते भी मैंने देख लिया था. और इसकी वजह से अब मेरा भी कुछ करने का मन होने लगा है. तथा आपको बताऊ तो मेरी चड्डी में अब आपका वो रूप देखकर पानी ही पानी निकलने लगा है. क्या चीज हो आप भाभी…. हाय हाय…. कितना खुशनसीब था वो जिसने आपको पाया था.
भाभी- अच्छा, इसका मतलब अनिल तुम अब बड़े हो गये हो.
मैं- कुछ भी समझो लेकिन अब आपका वो रूप मेरे दीमाग से निकल नही रहा है. मेरा मन कर रहा है की आपकी ऊँगली की जगह अगर मैं आपके साथ कुछ करूँ तो आपको इससे भी बेहतर मजा दे सकता हूँ.
इतना सुनते ही भाभी मेरे लंड की और नजर घुमाई और देखकर बोली- इतना बड़ा लंड है तुम्हारा? जरा खोलकर दिखाना?
इतना सुनते ही मैंने भी झट से उनको उनके बेडरूम में जाकर अपने लंड के दर्शन करवा दिए. जहाँ मेरा 7 इंच का लंड तनकर सख्त हो गया था. तथा भाभी की उस गुलाबी चूत में जाने के लिए बेताब हो रखा था.
मेरा लंड देखकर पहले तो भाभी एकदम से चौक गयी. इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे करके मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया. और बोली- काश मुझे पहले पता होता की तुम्हारे पास ऐसा लंड है तो मैं 1.5 बरस से दुःख नही पाती.
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मैं बोला- कैसे भाभी?
भाभी- जब से तुम्हारे भैया का निधन हुआ है तब से मेरी असली लंड से चुदाई बंद हो गयी है. और अब मुझे केवल चूत में ऊँगली करके ही काम चलाना पड़ रहा है. इसलिए अनिल प्लीज ये बात किसी से मत बोल देना.
मैं- नही भाभी ऐसी बात किसी से कही थोड़ी जाती है. यहाँ तक की मैं बाहर के दोस्तों को भी बेवकूफ बनाकर आया हूँ.
इतना सुनते ही भाभी ने प्यारी सी मुस्कान दी. और अब वो मेरे लंड को चूसने में लग गयी. तथा वह इस दौरान मेरे लंड को एक ही रफ्तार से चुसे जा रही थी. तथा चूसते-चूसते मेरे लंड का पूरा माल निकालकर अपने मुंह में पी गयी.
और अब भाभी बोली- अनिल मैंने तुम्हरा लंड चूसा है अब तुम प्लीज मेरी चूत को चुसो.
और ये बोलकर भाभी ने अपनी साड़ी को निकाल फेंका. और वह अब मेरे सामने उसी रूप में आ गयी जैसे वो नहा रही थी. कितनी सेक्सी लग रही थी दोस्तों मैं आपको बता नही सकता. क्योंकि इस दौरान मैं भी काफी घबराया हुआ था. और भाभी भी चुदने के लिए बेताब थी. इसलिए अब मैंने उनको बेड पर लेटने के लिए बोला. और वो तुरंत बेड पर जाकर लेट गयी.
तथा वह अपने टांग खोलकर अपनी चूत को चटवाने के लिए मानों तैयार ही थी. इसलिए अब मैंने पहले तो उनकी चूत की पंखुड़ियों को खोलकर देखा तो उसमे लार जैसा पतला पदार्थ नजर आया. जो की उनकी चूत में लगी आग की निशानी था. और ये सब देखकर मेरा मन सिर्फ उनकी चूत को चूसने का हो चला था. इसलिए अब मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत के दाने पर रख दिया.
तथा अब मैंने उनकी चूत को जोर-जोर से चाटने में लग गया. और मेरे चूत चाटने की वजह से भाभी को चुदाई का जोश बढ़ गया. तथा वह अब आह…अनिल ….सीईईईईसिसिसीइस्सि……… आआआआआआआआआअ……………..ऊऊऊऊऊऊऊ………सीईइसिसिसिसिसिसिसिसिसिसिसि…….. आआआआआआआअ…………… किये जा रही थी.
लेकिन मैं उनकी एक न सुन रहा था. तथा मुझे उनकी चूत का नमकीन पानी पिने में बहुत मजा आ रहा था. यहाँ तक की मैं अभी 10 मिनट पहले ही झड़ा था. लेकिन उनकी चूत चाटकर अब मेरा लंड फिर से सुनीता भाभी को चोदने के लिए फिर से खड़ा हो चला था.
अब मैंने भाभी को हल्की सी स्माइल की, मैं भाभी की बैक पे धीरे-धीरे अपना हाथ फेरने लगा, भाभी मस्त होती गईं, अब भाभी भी मेरे साथ देने लगीं. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, भाभी का जिस्म बहुत नरम-नरम लग रहा था, अब मैंने अपना दूसरा हाथ भी आंटी के पेट ऊपर सीधा करके रख दिया, और भाभी के पेट को ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया, भाभी आह….आहाहहः….अहहहहहह्हः…. अनिल…. प्लीज…..आहाहह्हाहाहा….. किये जा रही थी.
अब मैंने भाभी के होठों को चूमने लगा. तथा दोस्तों मेरा ये अंदाज देखकर भाभी बोली- पहले से खेले हुए खिलाड़ी लग रहे हो?
मैं बोला- नही भाभी जब से आपको देखा है तब से मेरे को खुद को पता नही चल रहा है मैं क्या क्या किये जा रहा हूँ.
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इतना कहते ही भाभी बोली- तेरे भैया ने तो कभी मेरे को ऐसा मजा नही दिया, जैसा तुम दे रहे हो अब तक तो तुमने लंड भी नही डाला है. लेकिन फिर भी मेरी चूत झड़ने के लिए बेताब हो गयी है. प्लीज अब मेरे को चोद दो तुम जल्दी से.
अब मैंने भाभी की टाँगों को अपने हाथ से फैला दीं, और मैंने भाभी की चुत को अपनी उँगली से फैलाया और अपना लंड भाभी की चुत के ऊपर रख दिया, भाभी को बहुत मज़ा आ रहा था शायद मुझसे भी ज़्यादा, अब मैंने धीरे से धक्का लगाया और मेरा लंड भाभी की चुत में चला गया और भाभी के मुँह से आवाज़ आई आह………अहहहहहः…..अनिल……..आहाह्हहहाहा….. फाड़ दो अपनी भाभी की चूत को प्लीज……. बहुत मजा आ रहा है….. बहुत दिनों से चुदाई की प्यासी हूँ…… आहाहहहः….. अनिल….. आई लव यू.
धीरे-धीरे करके मेरा सारा का सारा लंड भाभी की चुत में चला गया, भाभी मुझे कह रही थीं मुझे बहुत मज़ा आ रहाआह्ह्हाआ हाईईईई, सच में मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था, आआह्ह्ह्ह्ह ओफ्फ ओह्ह्ह आआह्ह्ह्हाहहह्हा हाहाहाह्हाआ………. मररररग्गीईई ओह्ह्होओओ की आवाज़ें मुझे पागल कर रही थीं. अब मेरा लंड में से पानी बह आ गया और भाभी भी संतुष्ट हो गई थीं.
लेकिन अभी उनकी सासु माँ का घर आने में 2 घंटा बाकि था. इसलिए भाभी बोली- अनिल तुम कहो तो एक राउंड और हो जाए.
मैं बोला- भाभी आप हुक्म करो मैं तो एक क्या पूरी रात तुम्हारे से चिपका रहू…. क्या सेक्सी माल हो आप…. कसम से आपको बहुत प्यार करने का मन कर रहा है…… आई लव यू मेरी भाभी…. आज से आप अपने आप को विधवा मत समझना क्योंकि मैं अब आपको जब कहोगी तब चोदने के लिए हाजिर हो जाऊँगा.
इतना कहते ही भाभी खड़ी हो गयी और मैं बैठकर फिर से उनकी चूत को चाटने में लग गया. तथा करीब 10 मिनट तक चूत में ऊँगली और चाटने के बाद फिर से भाभी जोश में आ गयी. और अब भाभी फिर से लंड लेने के लिए बेताब हो गयी थी. तभी मैंने भाभी का एक टांग उठाया और अब मैं खड़े-खड़े उनको चोद रहा था.
मैं जोर-जोर से भाभी में झटके देने लगा. मेरे झटके इतने खतरनाक थे की भाभी का पेशाब भी निकल गया. क्योंकि मैं इस राउंड में भाभी को और जोर से फट…फट…फट…फट… की आवाजें देते हुए चोदे जा रहा था. तथा आपको बताऊ इस दुसरे राउंड के दौरान सुनीता भाभी की चूत में से पानी ही पानी निकले जा रहा था. क्योंकि वो बोल रही थी- आज तक उन्होंने इतना बड़ा और मोटा लंड अपनी चूत में दाखिल नही करवाया था.
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इसलिए वह मेरी चुदाई से बहुत संतुष्ट हो गयी थी. तथा अब मेरे को किस पर किस किये जा रही थी. करीब 45 मिनट तक उनको लगातार चोदने के बाद अब मेरा लंड फिर से झड़ने के लिए बेताब हो गया था. तो मैंने अब उनके कूल्हों पर हाथ धरकर कसके पकड़ लिया और अपने लौड़े का माल उनकी चूत में फिर से छोड़ दिया.
तथा अब भाभी बोली- अब मैं संतुष्ट हो गयी हूँ. तुम एक काम करो अपने नम्बर मेरे को दे दो ताकि जब मैं तेरे को बुलाऊ तब तुम मेरे पास मौका देखकर चोदने के लिए आ जाओ. इसके बाद हम दोनों ने नंबर शेयर कर लिए तथा दोस्तों करीब 4 महीने हो गये है. जब भी मौका मिलता है सुनीता भाभी को चुदाई का ऐसा मजा देता हूँ की अब वो सबसे खुश होकर बात करने लगी है.
और कभी मेरे को उनकी चूत चोदने के लिए न मिले तो विडियो कॉल पर ही उनकी चूत के दर्शन करके अपने लंड को झाड़ लेता हूँ. आगे की Vidhwa ki chudai kahani फिर किसी कहानी में सुनाऊंगा. क्योंकि ये तो बस मेरी शुरुआत की कहानी ही थी अभी तो सुनीता भाभी का वो चुदाई वाला रूप भी मेरे सामने आ गया था जो अभी तक मेरे को नही दिखा था.
ये Vidhwa bhabhi ko choda कहानी आप हमारी वेबसाइट gandikahaniyan.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Vidhva bhabhi sex कहानी बहुत पसंद आई होगी. अगर आपको मेरी Gandi Kahaniyan पसंद आती है तो आप हमे कमेंट करके बता सकते है. हम आपके लिए ऐसे ही मजेदार कहानियां लेकर आते रहेंगे.