Vidhva Ki Chudai – चाचा के इंतकाल के बाद मैंने संभाली चाची की कमान
स्वागत है आप सभी का एक और नए Vidhwa sex stories के एपिसोड में. दोस्तों विधवा होना भी आज के समय में एक अभिशाप है क्योंकि अगर कोई औरत जवानी के समय में ही विधवा हो जाती है तो उस पर भांति-भांति की निगाहें रखनी शुरू हो जाती है. चूँकि सेक्स एक ऐसा शब्द है जिसे कोई खुले में बतलाना नही चाहता लेकिन अकेले में मिले तो सब पाना भी चाहते है. इसलिए विधवा पर निगाह रखना आजकल के समाज की मजबूरी हो गयी है. इसी Vidhva Ki Chudai कहानी में मुझे भी एक ऐसा अहसास मिला है जो मैं आपके संग सांझा करना चाहता हूँ.
दोस्तों मेरा नाम निलेश है और मैं राजस्थान के जालोर का रहने वाला हूँ. तथा मैं रोज इस पोर्टल भी लोगों द्वारा भेजी गयी कहानियां पढता हूँ. और इसी को ध्यान में रखते हुए मैंने भी सोचा की अगर लोग अपनी कहानी बता रहे है तो मुझे भी अपनी कहानी बतानी चाहिए. जिससे मैं अपना टाइम पास कर रहा हूँ मेरे प्यारे दोस्त भी मेरी कहानी से अपना टाइम पास कर सकें.
क्योंकि मेरे को इस कहानी में Vidhwa aurat ka bf बनने का जो सौभाग्य मिला है. वो मैं आज तक भुला नही पाया हूँ. आपको बताऊ मेरी कहानी मेरी पास की आंटी सुशीला की है. जो अभी महज 40 बरस की हुई है. तथा उनके अभी 2 बच्चे भी है. लेकिन दुर्भाग्य से आज से करीब 3 साल पहले उनके पति रामू काका का सड़क दुर्घटना के कारण निधन हो गया था. और इसके बाद से जो हुआ वो मैं आपके समक्ष रख रहा हूँ…
दरअसल दोस्तों सुशीला आंटी एक बेहद सेक्सी लेडी है. जो घाघरा चोली पहनती है. तथा जब वो चलती है तो पुरे गाँव की निगाह उनकी पर टिकी रहती है. क्योंकि एक तो वो विधवा रह गयी. ऊपर से इतनी सेक्सी महिला जिसे हर कोई मर्द पाना चाहे. इसलिए हमारे इधर बॉयफ्रेंड बनाने वाला कल्चर अभी प्रचलित नही हुआ है. क्योंकि हम गाँव में रहते है. इधर अगर कोई चुपके से चुदाई हो जाए तो दूसरी बात वरना कैसे जैसे भी इन्सान अपना गुजारा कर लेता है. लेकिन खुले में गर्लफ्रेंड-बोय्फ्रेंड नही रखते इधर.
इसलिए दोस्तों अब मेरी भी उम्र चुदाई करने वाली हो गयी थी. अभी मेरी उम्र करीब 21 बरस की हो गयी है. तथा मेरा लंड अब बहुत तेज फनफनाना शुरू कर चूका है. यहाँ तक की अब मेरे को भी सुशीला आंटी की चुदाई के ही ख्याल आने शुरू हो चुके थे. क्योंकि मैंने एक बार उन्हें नहाते हुए देख लिया था. जब वो बाहर की ट्यूबवेल पर नंगी नहा रही थी.
तभी से मेरे दीमाग से सुशीला आंटी नही निकल रही है. इसलिए दोस्तों अब मैं खुद ही आंटी से अपनी नजदीकियां बढ़ाने लगा था. और कभी उनका काम में हाथ बंटा देता था तो कभी बातों से उनका टाइम पास कर के आता था. लेकिन दिन में एक बार उनके घर जाने की मानों मेरे को आदत सी पड़ गयी थी. क्योंकि मेरा भी उद्देश्य अब उनकी चूत बजाना था.
इसलिए दोस्तों एक दिन मैंने देखा की उनके घर पर काले लम्बे वाले बैंगन पड़े है. और फिर मुझे लगा की शायद ये लोग इसकी सब्जी बनायेंगे. लेकिन फिर मैं देखा की सुशीला आंटी अब नहाने के लिए बाथरूम में जाने वाली है तथा अपने पास एक बैंगन भी ले जा रही है. पहले तो मेरे को लगा की शायद ये खराब बैंगन है इसलिए सुशीला आंटी अपने साथ लेकर जा रही है.
लेकिन फिर मैं भी अब उनके घर जाकर उनको नंगा देखने के लिए बैठा था. तो जब सुशीला आंटी नहाने के लिए अपने कपड़े उतार चुकी थी. तो उसके बाद उन्होंने सर्वप्रथम उस बैंगन को अपनी चूत में डाल लिया. और ये सब देखकर मैं तो मानों हैरान सा रह गया. क्योंकि मैं इस दौरान बाथरूम के बाहर लगे कपड़े के पर्दे के छेद से ये सब देखे जा रहा था.
और इस दौरान मैं खुद कम्पन करने लग गया. और सोचने लगा की आखिर ये है क्या? लेकिन इसके बाद सुशीला आंटी ने नहाने की बजाय उस बैंगन को पहले अपनी चूत में जोर-जोर से आगे-पीछे किया और तेज-तेज सांसे लेने लग गयी. तथा करीब 5 मिनट तक पूरा बैंगन घुसाकर अपने आप को शांत किया. और इधर मैं सबकुछ देखे जा रहा था. तथा मेरे को ये सब देखकर अब आंटी की चुदाई का बहाना मिल चूका था.
क्योंकि दोस्तों मैं इतने दिन तो डरता था की कहीं मैं चुदाई का इनविटेशन दूंगा और आंटी मेरे पर गुस्सा हो जाएगी तो लेने के देने पड़ जायेंगे. लेकिन जब से मैंने उनकी इस कद्र चुदाई वाली प्यास देखी तब से मेरा दिल तो मानों गार्डन-गार्डन हो चला था.
जिसके बाद अब आंटी भी नहाकर निकल आई और फिर आते ही जब वो अपने कमरे में गयी तो मैं भी उनके पीछे-पीछे चला गया. और उनसे बातें करने में लग गया. और अब मुझे अपने काम की बात पर आना था. इसलिए मैंने आंटी से पूछा- आंटी आप नहाने के लिए बैंगन भी लेकर जाती हो क्या? इसका क्या काम है नहाने में?
आंटी- तूने कब देख लिया मैं बैंगन लेकर गयी थी.
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मैं- जब आप नहाने के लिए जा रही थी तब मैंने देखा था की आपके हाथ में बैंगन था.
आंटी- अरे वो तो खराब हो गया था इसलिए बाहर फैंकने के लिए लेकर गयी थी.
मैं- अच्छा, फिर मैं काफी देर तक सोचने लगा की ऐसे सीधी ऊँगली से घी निकलने वाला नही है. इसलिए बाद में बोला- आंटी आपको एक बात बताऊ अगर आप मेरे को मरोगी नही तो?
आंटी- हाँ बताओ निलेश क्या बात है, प्लीज.
मैं- पहले कसम खाओ की आप नाराज नही होंगी?
आंटी- अरे तेरी बात से मैं नाराज हो सकती हूँ क्या? तुम तो बताओ क्या बात है?
मैं- मैंने आपको बाथरूम में बैंगन का इस्तेमाल करते हुए देख लिया था.
मेरी ये बात सुनते ही आंटी खूब हंसी और मेरे को मारने में लग गयी. और बोली- पागल क्या-क्या देखता है तू? और क्यूँ देखता है?
मैं- क्योंकि आंटी मैं जो आप बैंगन से मजे ले रही थी वो अपने लंड से देना चाहता हूँ. इसलिए मैंने आपको नहाते हुए देखा था.
आंटी- अच्छा, इसका मतलब बड़ा हो गया है तू?
मैं- अब आप कुछ भी समझो लेकिन जब से आपको देखा है तब से मेरा लंड बैठने का नाम तक नही ले रहा है..
आंटी- अच्छा तो फिर दिखा देखा कैसे खड़ा कर रखा है?
इतना सुनते ही मैंने अपनी पेंट उतारकर आंटी को अपने लंड के दर्शन करवा डाले. जिसे देखकर आंटी एक बार तो चौक गयी और बोली- ओह्ह…माय..गॉड… इतना बड़ा और सख्त लंड है तेरा मेरे को तो लगा की तू अभी तक बच्चा ही है.
मैं- नही आंटी वो आपने गलत ही समझ लिया, अब मैं बच्चा करने के योग्य हो चला हूँ.
इतना सुनते ही आंटी ने मेरे को कमरे में ही रहने को बोला. और बाहर निकलकर अपने बच्चों को बोला की तुम ये पैसे पकड़ो और बाहर से जो भी खाकर आना है खाकर आ जाओ. और फिर बच्चों को बाजार में भेज दिया.
तथा आंटी अब जल्दी से चुदने के लिए वापस कमरे में चली आई. और फिर आकर मेरे पास बैठ गयी. तथा मेरे को प्यार से देखने में लग गयी. और फिर मेरे को गोद में ले डाली. अब आंटी खुद से ही मेरे को पप्पियाँ दिए जा रही थी. और बोली- किसी को बतायेगा तो नही ना की मैं सुशीला आंटी को ऐसे देखा था?
मैं बोला- पागल हो क्या आंटी मैं कोई समझता नही हूँ की क्या आपकी मजबूरी. जो हाल आपका हो रखा है ठीक वैसा ही मेरा हो रखा है. इसलिए आप मेरी तरफ से निष्फिक्र रहो.
और फिर आंटी मेरे को किस पर किस करने में लग गयी. तथा करीब 10 मिनट तक चूमा चाटी करने के बाद अब आंटी खड़ी हो गयी. और अब मैं निचे से उनका घाघरा उपर करने में लग गया. जहाँ उनका वो गोरा बदन मेरी आँखों में चमकने सा लगा था. इसलिए मैंने घाघरे को ऊपर करके आंटी को सहलाना शुरू कर डाला. और वो महज मेरे हाथ फिराने से ही सिसकारियां भरनी शुरू कर दी.
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मैं बोला- आंटी आप तो इतने में ही सिसकारियां ले रही हो?
आंटी- पुरे 3 बरस हो गये है इस चूत को चुदे हुए, सिसकारियां न भरू तो और क्या करूँ?
आंटी के मुंह से ये बात सुनकर अब मैं भी खड़ा हो गया और आंटी के होठों से अपने होठ मिला दिया. तथा साथ में उनकी चूत पर ऊँगली फेरने में लग गया. और मेरे ऊँगली फेरने की वजह से आंटी की चूत से टप-टप करके पानी निकलने लगा था. और करीब 10 मिनट तक ऊँगली करने के बाद अब फ्लोर पर पूरा पानी-पानी हो गया था. तथा आंटी भी अब असली लंड लेने के तड़पने लगी थी.
इसलिए मैंने अब ज्यादा देर न करते हुए आंटी को खटिया पर पटका और अपनी पेंट उतारकर अपने लंड को आंटी की चूत के सामने ला दिया. इसके बाद मेरा लंड देखते ही आंटी ने झट से मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया. आपको बताऊ दोस्तों आंटी की चूत बहुत चौड़ी थी. क्योंकि वो दो बच्चों की माँ थी इसलिए जब मैंने अपना लंड डाला तो उसे बिलकुल असर भी नही हुआ. लेकिन मेरे लंड की लम्बाई पूरी 7 इंच की थी.
इसलिए जब मैंने पूरा लंड आंटी की चूत में जाने दिया तब जाकर सुशीला आंटी चिल्लाने लगी…. और आह….आहाह्हहा….अहहहः…अहहहः…अहहह्हा…. करने में लग गयी. उनकी ये आवाज मेरे को इतनी अच्छी लगी की अब मैं लगातार अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ने में लगा था. और आंटी की आँखों में आंसू आने लगे थे.
और वो इस दौरान आहाह…. अहहहा…अ अह्हहहहाहा …. ईईईइ…….ऊऊऊऊउ करने में लगी हुई थी. इसलिए अब मेरे अंदर कुछ अलग ही लेवल का जोश आ चूका था. तथा अब मैं आंटी को किस भी कर रहा था. और मेरी चुदाई को फील करके आंटी से भी रहा नही गया. इसलिए उन्होंने अपने बूब्स को दबवाने के लिए खुद से ही अपना ब्लाउज खोल डाला.
जहाँ मैंने देखा की आंटी की बूब्स भी काफी सख्त और दूध पिलाने वाले हो रखे थे. इसलिए एक तो मैं आगे-पीछे हो रहा था. ऊपर से आंटी के मस्त-मस्त बूब्स को चूस रहा था. और इधर आंटी मेरी चुदाई से पागल हुए जा रही थी. क्योंकि शायद रामू काका का लंड इतना बड़ा नही था जो आंटी की चूत की जड़ पर असर कर पाता हो.
इसलिए करीब 5 मिनट तक चोदने के बाद ही आंटी झड़ने लगी थी. लेकिन मैं कहाँ इतनी जल्दी रुकने वाला था. मैं इस दौरान आंटी की गोरी-गोरी जाँघों को दोनों हाथों में लेकर फट–फट—फट—फट—फट—फट—फट–फट— करके चोदे जा रहा था. और करीब 5 मिनट बाद निढाल हुई आंटी फिर से चुदवाने के जोश में आ गयी. और फिर से वो आह…आहाहा…अहहाह…अहहः..हाहाह…अहहाह…करके मेरे लंड को अपने अंदर तक फील करने में लग गयी.
और अब वो काफी खुश नजर आ रही थी. इसलिए मेरे को उनकी सुन्दरता देखकर रहा नही जा रहा था. इसलिए मेरा लंड अब छुटने की कगार पर आ गया. इसलिए मैंने आंटी से बोला- आंटी मेरा लंड का माल निकलने वाला है, कहाँ निकालू?
आंटी बोली- पागल निकाल दे इस चूत के अंदर ही प्लीज,,, बाहर मत निकाल देना वरना सत्यानाश हो जाएगा इस ताबड़तोड़ चुदाई का.
मैं बोला- कैसे आंटी?
आंटी- ऐसे चोदकर भी कोई माल बाहर निकालता है क्या भला?
आंटी के मुंह से ये शब्द सुनकर अब मैंने अपने लंड को जोर-जोर से धक्के देने शुरू कर दिए. और आंटी भी अब मेरे को कसकर पकड़े हुए थी. इसलिए करीब 20 मिनट तक चोदने के बाद अब मैं आंटी की चूत में ही डिस्चार्ज होना शुरू हो चूका था. मेरे वीर्य की गर्मी को महसूस करके आंटी अब आह…आह्ह…आह्हह… निलेश… आई लव यू… काश तू मेरे को पहले ही चोद लेता तो कितना मजा आता. मेरे को बैगन काम में नही लेना पड़ता कभी भी.
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ये सब कहकर अब आंटी मेरी कमर को सहलाने में लग गयी. और करीब 10 मिनट तक हम एक दुसरे से चुदाई वाली बातें शेयर करते रहे. जिसके बाद दोस्तों मेरा लंड फिर से आंटी को चोदने के लिए फनफनाने में लग गया. और अब आंटी भी समझ चुकी थी की अब फिर से चुदाई होने वाली है. इसलिए वह बोली- निलेश इस बार अगर तू मेरे को कुतिया बनाकर चोदेगा तो बहुत मजा आएगा.
मैं बोला- वो कैसे?
आंटी- क्योंकि जब तेरे रामू काका मेरे को कुतिया बनाकर चोदते थे तो मेरे को बहुत ख़ुशी मिलती थी. और मैं चाहती हूँ की अब तू भी मेरे को उसी अंदाज में चोदे.
मैं- ठीक है आंटी बनो फिर कुतिया.
इतना कहते ही आंटी खटिया से उतरी और फ्लोर पर दरी बिछाकर कुतिया बन गयी. जहाँ मैंने उनको पीछे से देखा तो पाया की मेरी पहली चुदाई से ही उनकी चूत काफी लाल हो चुकी है. और अब फिर से चटवाने के लिए तैयार हो गयी है. इसलिए पहले तो मैं उनके कूल्हों पर अपना प्यार भरा हाथ सहलाया इसके बाद मैंने उनकी चूत को चौड़ा करके पानी पीना शुरू कर दिया.
मेरा मुंह आंटी की चूत पर लगते ही आंटी की आआआआआअ……आआआआआअ……….अ………….आआआआआआआआआआआ………… निकलनी शुरू हो गयी. अब वो फिर से मेरे लंड को लेने के लिए पागल होने लग गयी.
जिसके बाद करीब 10 मिनट तक चूत चटाकर अब मैं पीछे से आंटी की चूत में अपना लंड डाल दिया. और अब उनके कंधों को पीछे से पकड़कर ताबड़तोड़ तरीके से धक्के पर धक्के देने में लग गया. इस दौरान मेरे को भी सुशीला आंटी की फिर से आह…आहाह…आह्हह…. निकलवाने में असली मर्द जैसा अहसास हो रहा था. क्योंकि आंटी मेरी इस चुदाई से अपनी चूत से पानी धारा छोड़े ही जा रही थी.
तथा उनकी चूत को ऐसी ख़ुशी मिल रही थी की वो अब मेरे को रुकने का नाम भी नही ले रही थी. और जोर-जोर से चोदने के लिए प्रोत्साहित किए जा रही थी. जिसके बाद मैं भी कुल 1 घटे तक आंटी को उनकी इच्छा के अनुसार चोदे जा रहा था. और फिर आखिर मैं मैंने उनके कंधों को जोर से जकड़कर अपना माल फिर से आंटी की चूत में ही छोड़ दिया. फिर करीब 10 मिनट तक उनके पीछे ही लेटा रहा.
जिसके बाद अब आंटी के बच्चे भी बाजार से समान लेकर आ चुके थे. और वो भी कमरे का दरवाजा खोलने के लिए आवाज पर आवाज दिए जा रहे थे. इसलिए हमने झट से कपड़े पहने और कमरे को खोलकर बच्चों को अंदर लिया. तथा फिर साइड में जाकर आंटी बोली- फिर कब आओगे निलेश मुझे चोदने?
मैं बोला- मेरी जान तुम जब बुलाओगी मैं तब चला आऊंगा आपको चोदने.
आंटी- आज रात को आ जाना.
मैं- ठीक है मैं कॉल कर दूंगा, आप दरवाजा खोल देना.
आंटी- दरवाजा खुला ही मिलेगा अब तुमको हमेशा… चिंता मत करो.
इसके बाद मैं फिर से रात को आंटी की चूत की प्यास बुझाने के लिए चला गया. और पूरी रातभर मैंने सुशीला आंटी की करीब 5 बार चूत बजाई. तथा दोस्तों करीब पिछले 6 माह से मैं रोज आंटी की चूत को चोदता हूँ. मेरे तो मानों उस दिन से भाग से खुल गये है. आगे की चुदाई की कहानी मैं किसी और एपिसोड में बताऊंगा, तब तक मेरा इंतजार कीजिएगा.
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