Jangal Me Chudai – बकरी चराने गई चाची का चुदाई का नशा उतारा
नमस्कार दोस्तों, उम्मीद है की आप सब अपने जीवन में एकदम बढिया होंगे? दोस्तों मेरा नाम राहुल है और मैं राजस्थान के मेवात का रहने वाला हूँ. मैं इस पोर्टल का रेगुलर विजिटर हूँ. क्योंकि यहाँ पर लोगों द्वारा भेजी गयी अपनी-अपनी कहानियां बहुत ही मजेदार होती है. जिसकी वजह से मैंने इस पोर्टल को बुकमार्क भी भी कर लिया है. इसी कड़ी में मैं भी आपके सामने आज मेरे साथ गुजरी Jangal Me Chudai कहानी लेकर आया हूँ.
मेरी ये कहानी दरअसल मेरी पड़ोस की चाची निरमा की है. जिनके साथ मैंने जंगल में सेक्स किया है. निरमा चाची के बारें में बताऊ तो वो एक हुस्न की परी है. तथा उसका गोरा बदन और उसकी निराली चाल मेरे लंड को हमेशा उठाने के लिए तैयार रहती है. क्योंकि दोस्तों वो खुद भी चुदाई के लिए तड़पती रहती है. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पतिदेव अक्सर काम के सिलसिले में घर से बाहर ही रहते है.
और इसलिए मेरे को उनकी रसीली चूत को चोदने के मजा मिला है. मैं अभी 20 बरस का लौंडा हूँ और मेरे लंड की साइज़ पूरी 6 इंच की है. तथा मैंने इससे पहले भी कई लड़कियों की चूत चोदी है. लेकिन जब से मैंने निरमा चाची की चूत को चोदा है तो मेरा उन पर मानों दिल सा आ गया है. क्योंकि एक तो उनकी वो रसीली चूत ऊपर से उनकी चुदवाने की स्टाइल. आए… हाए…. मेरे को बहुत भाति है. और इसलिए मैं और निरमा चाची पिछले करीब 12 महीने से लगातार चुदाई का आनंद ले रहे है.
असल में शुरुआत कैसे हुई वो मैं आपके सामने पेश कर रहा हूँ. ये Jangal me xxx कहानी जब मेरी स्कूल की छुट्टियों का समय था तब की है. इस दौरान मेरे घरवाले मेरे को बकरी चराने के लिए पास के जंगल में भेज दिया करते थे. और इस दौरान मैं जंगल में अकेला ही बकरी लेकर चला जाता था. अब दोस्तों एक दिन मेरी निरमा चाची भी अपनी बकरियां लेकर जंगल में चराने के लिए लेकर आ गयी.
तभी आपको बताऊ की मेरे पास एक बकरा था. जो उनकी बकरी के पीछे ही पड़ गया. और गाँव में किसी के पास बकरा नही होने के कारण उनकी बकरी भी बच्चा नही दे पा रही थी. इसलिए वो निरमा चाची की बकरी पर ऐसे चढने लगा की मैं देखकर हैरान रह गया. इसलिए निरमा चाची ने कहा की तुम मेरी बकरी पकड़ लो ताकि ये बकरा ढंग से इस बकरी को पेल सकें.
इतना सुनकर मैंने निरमा चाची की बकरी को सामने से पकड़ लिया और चाची खुद पीछे से बकरे की तरफ देखने लग गयी. और जांचने में जुट गयी की ये जब चुदाई के लिए ऊपर चढ़ता है तो इस लंड बकरी की चूत में जाता है या नही? इसलिए मैं सामने से पकड़ता हुआ थकने लग गया. और फिर मैंने बोला की- चाची आप ही सामने से पकड़ लो मैं थक गया हूँ.
क्योंकि ये बकरा बहुत टाइम लगा रहा है. और दूर भी नही हट रहा है. आप पीछे क्या कर रही हो?
चाची बोली- अरे मैं पीछे ये देख रही हूँ की इस बकरे का अंदर भी जा रहा है या नही ठीक से?
मैं- अच्छा, तो जा रहा है ना अंदर?
चाची- हाँ जा तो रहा है, लेकिन ढंग से नही जा रहा है. इसलिए जब ये चढ़ता है तो इसके हाथ लगाकर अंदर घुसा रही हूँ.
मैं बोला- अच्छा, लेकिन चाची अब बस बहुत हुआ पूरा 1 घंटा हो गया है, मेरे से और नही देखा जा रहा है.
चाची- ऐसा क्यों?
मैं- क्योंकि इनको ये सब करते हुए देखकर मेरे से भी अब रहा नही जा रहा है.
चाची- अच्छा, इसका मतलब अब इनको छुड़ाना पड़ेगा?
मैं- अब आप कुछ भी मानों लेकिन मेरे से तो और नही देखा जा रहा है.
चाची बोली- देखा तो मेरे से भी नही जा रहा है, लेकिन खुद पर कण्ट्रोल कर रखी हूँ कैसे-जैसे.
मैं- अच्छा, चाची इसका मतलब आपको भी वो वाली फीलिंग आने लग जाती है क्या इन्हें देखकर?
चाची- हाँ जैसे तेरे को आ रही है उसी प्रकार मेरे को भी आने लगी है.
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इसी दौरान चाची उकडू बैठी हुई थी जहाँ सलवार के ऊपर चूत के सामने मेरे को उनके कुछ हल्का-हल्का पानी दिखने लग गया. और मैं समझ चूका था की निरमा चाची भी अब चूत चुदवाने के लिए बेताब हो चली है. इसलिए मैंने उनसे सवाल कर ही लिया- आपके पास तो चाचू है ना?
चाची बोली- कहाँ है चाचू, उनको काम से ही फुर्सत नही है.
मैं- हाँ दिख तो ऐसे ही रहा है.
चाची- क्या मतलब?
मैं- मतलब आपके सामने ये बहता पानी आपकी फीलिंग्स को बयाँ कर रहा है.
इतना सुनते ही चाची मुस्कुराने में लग गयी. और बोली- ये सब नार्मल इन्सान की निशानी है.
और फिर हम दोनों ने बकरा बकरी को आजाद कर दिया. जहाँ बकरा अब बकरी को भगा-भगाकर चोदने में लगा हुआ था. फिर जाकर अब चाची बोली- चलो उस पास वाले एक सुनसान मकान में जाकर छाया में चलते है. क्योंकि इधर गर्मी बहुत है.
इतना कहते ही हम पास के मकान मैं चले गये और वहां जाकर दोनों एक दुसरे को निहारने में लग गये. तभी चाची ने पूछा- तुमने कभी किसी के साथ सेक्स किया हुआ है क्या?
मैं- किया हुआ तो है लेकिन आपके जितनी सुंदर लड़की से कभी नही किया आजतक.
चाची- अभी तेरा कैसा मन हो रहा है? सच-सच बताना मैं किसी से नही कहूँगी.
मैं- अभी चाची मेरा मन सिर्फ आपके साथ उस बकरे की तरह चुदाई करने का हो रहा है. जैसे वो उस बकरी को घोड़ी बनाकर चोदे जा रहा था ठीक वैसे ही मैं भी चाहता हूँ की आपको उसी अंदाज में चोदु.
चाची- तूने तो मेरे मुंह की बात छीन ली. चल आ फिर मेरी गोद में बैठ जा.
इतना सुनते ही मैं चाची की गोद में बैठ गया. जहाँ पहले तो हमने जंगल में चारों तरफ देखा और पाया की वहां इस दौरान कोई नही था. इसके बाद निरमा चाची और मैं एक दुसरे को चूमाचाटी करने में लग गये. और करीब 10 मिनट तक मैं उनकी कोमल त्वचा को छूता रहा. और साथ में उनके गुलाबी होठों का रस पीता रहा.
अब हम दोनों ही चुदाई के नशे में चूर हो चुके थे. इसलिए चाची ने मेरे से अपने बूब्स दबवाने की अपील की. और मैंने भी उनका आर्डर मानते हुए उनके 34 के मोटे-मोटे बूब्स को लगातार दबाना शुरू कर डाला. जिन्हें दबवाता हुआ महसूस करके अब चाची की आह….. आह्हहहः….अहहहः….अहहहहः….. निकलनी शुरू हो गयी. और वो मेरे को अब पागलों की तरह चूमे जा रही थी.
तभी मैं बैठ गया और अब मैंने निरमा चाची को अपनी गोद में ले लिया. जहाँ मैंने महसूस किया की वो सिर्फ 50 KG वजन की ही थी. इसलिए मुझे भी उनका वजन भारी नही नगा. और अब मैं अपना हाथ उनके पेट पर सहलाते हुए नाड़े से होकर उनकी चूत तक पहुंचा दिया. जहाँ मैंने देखा की जैसे चाची ने पहले से ही कोई पेशाब कर रखा हो. इस प्रकार उनकी चूत गीली हो रखी थी.
और एकदम गर्म फील हो रही थी. जिसे छुकर मेरे अंदर एक अजीब सा चुदाई वाला जोश आ गया था. क्योंकि मैंने आजतक इतनी रसीली चूत कभी महसूस नही की थी. हालाँकि चुदाई के बाद तो हो ही जाती है. लेकिन चुदाई से पहले इतनी तड़पती चूत नही देखी थी. इसलिए मेरे मन में सवाल आया और मैंने चाची से पूछा- चाची सच-सच बताना कितने दिन हो गये आपको चुदवाये हुए?
चाची बोली- करीब 6 महीने हो गये है, जब से तेरे चाचा घर पर नही है तब से ये चूत भरी जवानी में लंड के लिए बहुत तड़प रही है.
इतना सुनते ही अब मैंने चाची के सलवार का नाड़ा खोलना शरू किया. लेकिन मेरे से नही खुला. इसलिए चाची ने खुद से ही अपने सलवार का नाड़ा खोल दिया. और अब खुद ही सलवार को निचे खिसका दी. जहाँ मैंने देखा की चाची ने नीले रंग की पेंटी पहन रखी थी. जिस पर उनकी गोरी गांड एकदम चिकनी नजर आ रही थी. और अब मेरा लंड ये सब देखकर और भी सख्त हो चला था.
तथा चाची की ही तरह मेरे लंड से भी चड्डी के अंदर पानी निकलने में लग गया था. अब मैंने सोचा की कोई इधर आ न जाए इससे पहले चाची को चोद लेता हूँ. इसके बाद कोई अगले राउंड के बारें में सोचूंगा. इसलिए मैंने अब कोई देर नही की.
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फिर मैंने अपना हाथ नीचे डाला और लन्ड को पेंट से आज़ाद कर दिया. और अब मेरा 6 इंच का लंड एकदम तनकर तैयार खड़ा था. जिसे देखकर चाची से भी रहा नही गया और उन्होंने बिना बोले ही मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चुसना शुरू कर दिया. और करीब 2 मिनट तक चूसती ही रही. और उनका लंड चूसने का अंदाज ऐसा था दोस्तों की अब मेरे को लग रहा था की वो चुदने के लिए काफी बेताब है.
इसलिए अब मैंने भी कमरे के फर्श को पहले साफ़ किया और अब चाची की चुन्नी बिछाकर उनको लिटा दिया. तथा अब मैं धीरे-धीरे करके उनकी पेंटी को उतारने में लग गया. जहाँ मेने देखा की उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे. और एकदम भूरे कलर के लग रहे थे. ऐसा लग रहा था की चाची की चूत 16 साल की लड़की वाली हो. इसलिए अब मैंने चूत पर अपनी ऊँगली लगाई. और ऊँगली लगाते ही चाची की आहाहहः…अहहहहः…अहहहः….. राहुल….. प्लीज…. अहहहहह्हा….. मत तडपाओ…. प्लीज आओ मेरे ऊपर अब जल्दी से.
इसलिए मैंने अब उनकी सलवार और पेंटी को पूरा खोलकर साइड में कर दिया. तथा अब मैं पहले उनकी चूत को चाटने में लग गया. जहाँ उनका छोड़ा हुआ पानी पीकर मैं खुद भी मदमस्त हो गया. और चाची तो पहले से ही चुदने के लिए बेताब हो रखी थी. इसलिए अब मैं अपने लंड को चाची की चूत के सामने लाकर अपने टोपे को चूत पर सहलाने में लग गया.
जिसे महसूस करके चाची की फिर से आआआआ….ऐईईईईईईई…….. ऊऊऊऊऊउ………सीसिसिसिसिस्सिसीस…. निकलने लग गयी. और अब चाची ने खुद से ही मेरे लंड को अपनी चूत के छेद पर सेट कर डाला. और बोली- अब मत तडपाओ मेरे राजा अंदर जाने दो इस लंड को मेरे से बिलकुल भी रहा नही जा रहा है…. प्लीज.
निरमा चाची की ये तड़प महसूस करके अब मैंने अपने लंड को झट से उनकी चूत में घुसा डाला. और जैसे ही मेरा पूरा 6 इंच का लंड एकदम से घुसा तो चाची एकदम से चिल्लाई, आआआआआआआआआ………… ईईईईईईईईईईई………….ऊऊऊऊऊऊऊ………….. धीरे करो पागल ये चूत तुम्हे ही चोदनी है. सब्र रखो… प्लीज….प्लीज…प्लीज.
लेकिन मैंने चाची की एक न सुनी क्योंकि मैं पहले से चुदाई के मामले में एक धाकड़ बन्दा था. इसलिए अब मैं चाची को लगातार धक्के पर धक्के देने में लग गया. और उनके मुंह पर मैंने अपने होठ लगा दिए. जहाँ अब उनकी आवाज को बाहर नही आने दे रहा था. क्योंकि हम कोई बंद कमरे में तो थे नही. इधर जंगल में थे और चाची की आआआआआ……ईईईईईई… सुनकर कोई पास आ जाता तो लफड़ा हो जाता है.
इसलिए अब जैसे ही करीब 5 मिनट चोदने के बाद चाची को मजा आने लगा तो वो मेरी कमर पर अपना प्यार भरा हाथ सहलाने में लग गयी. और वह खुद से ही मेरे को किस करने में लग गयी. तथा मैं भी समझ चूका था की अब चाची को भरपूर मजा आ रहा है. इसलिए अब मैंने अपनी चुदाई की स्पीड में इजाफा कर डाला. और अब मैं दनादन चुदाई का मजा देने में लग गया.
और चाची भी इस दौरान निचे से उठकर खुद ही अपनी गांड उठाकर मेरे लंड को अंदर तक लेने में लग गयी. और साथ में अपनी चूत से पानी भी झाड़ने में लग गयी. क्योंकि वो बहुत दिनों से चुदाई की प्यासी थी. इसलिए उनकी चुदाई की प्यास तो दोस्तों अलग ही लेवल की थी.
मुझे उसकी प्यारी सी आहे अच्छी लग रही थी, मैंने उनकी गर्दन चूमनी शुरू कर दी. वो लगातार मेरे लंड से चुदकर करीब 2 बार झड़ चुकी थी. और अब वो फिर से करीब 20 मिनट चुदवाने के बाद आआआआआआआ………..आआआआआआअ……………आआआआआआआआअ……… करने में लग गयी.
फिर मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई आआह! हम्मम! आआअह! ओह! मैंने बुरी तरह उसकी चूचियां और निप्पल नोच दिए वो चीखने लगी. अआआह! राहुल आगाह…..! ऊईझ! मज़ा आ गया अआआह! राहुल….. कहाँ थे तुम इतने दिन मेरी जान…. आई लव यू..
चाची के मुंह से ऐसे प्यार भरे शब्द सुनकर अब मैं भी पिघलने लगा था. और अब मेरा भी लंड झड़ने के लिए तैयार हो गया. इसलिए अब मैंने अपने झटके बढ़ा दिया. और फिर अंत में मैंने अपने लंड को बाहर निकलकर अपने का माल चाची के पेट पर छोड़ दिया. और मेरी इस हरकत से चाची ने मुंह बना लिया.
मैं कहा- नाराज हो गयी क्या आप?
चाची- और नही तो क्या ऐसी चुदाई करके भी कोई अपने माल को बाहर छोड़ता है भला? मेरी चूत के अंदर ही छोड़ देते पूरी चुदाई का मजा किरकिरा कर दिया तुमने.
मैंने कहा- सॉरी चाची, अब नही करूँगा ऐसा.
चाची बोली- अब तुम वैसे ही चोदो मेरे को जैसे वो बकरा बकरी को चोद रहा था घोड़ी बनाकर.
मैं बोला- ठीक है चाची जो हुक्म आपका.
इतना कहते ही मैंने अपने लंड फिर से चाची के मुन्ह में दे दिया. और फिर से चाची मेरे लंड को आइसक्रीम की तरह चूमने में लग गयी. और करीब 10 मिनट तक लगातार चूसने के बाद अब मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. और अब चाची खुद से ही घोड़ी बन गयी.
इसके बाद मैं फिर से चाची के पीछे आया और अपने लंड को उनकी चूत में घुसा दिया. पहले-पहले तो जब लंड घुसा तब चाची की चीख निकली लेकिन करीब 10-20 झटकों के बाद अब चाची को भी पीछे से चुदवाने में इतना मजा आने लगा की वो अब मुझे जोर-जोर से चुदाई के लिए कहने में लग गयी.
मैं लगातार धक्के मार रहा था, वो भी मस्त होकर पीछे से अपनी गांड को आगे-पीछे करने में लगी थी. इसी दौरान अब मैंने उनकी चोटी पकड़ी और अब मैं उनको तेज-तेज धक्के देने में लग गया. जहाँ उनकी चूत से पानी का फव्वारा बहने में लग गया. क्योंकि मैं अब उनको करीब आधे घंटे से नॉनस्टॉप तरीके से इसी अंदाज में चोदे जा रहा था.
और मैंने निचे फ्लोर पर देखा तो उनकी चुन्नी अब पूरी पानी-पानी हो गयी थी. और उनकी जांघ से होकर अब चूत से निकला पानी अब भी निकले ही जा रहा था. ये सब देखकर अब मुझे भी जोश बढ़ने लग गया. और अब मैं फिर से उनकी गांड को कूटते हुए चांटे पर चांटे मारे जा रहा था. और उनकी पूरी गांड को लाल कर दिया. तथा चाची मेरे को एक भी बार मना नही की.
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क्योंकि मेरी चुदाई के हर अंदाज से वो एकदम खुश थी. इसलिए अब मेरा खुदा का झड़ने का फिर से समय आ चूका था. इसलिए अब मैंने चोटी को छोड़ा और दोनों हाथों से चाची के कंधों को जकड़ लिया और अपना लंड चाची की चूत की गहराई में समा दिया. और मेरा लंड इस कद्र पूरा अंदर महसूस करके चाची बोली- आआआ…..ईईईईए……. चुदाई हो तो तेरे जैसी वरना हो ही नही.
मैं बोला- कैसे चाची.
चाची बोली- आज से तुम मेरे को चाची मत बोलना मैं अब तुम्हारी जान हूँ. समझे तुम?
मैं- सॉरी मेरी जान, मजा आया ना आपको?
चाची- ऐसा मजा आया है मेरी जान की तेरे चाचू ने कभी नही दिया अपनी जिन्दगी में ऐसा मजा…. थैंक्स मेरी जान.
इसके बाद हम दोनों ने ही उस दिन कपड़े पहन लिए और करीब 3 घंटे तक चुदाई का मजा लेकर वापस अपने घर चले आए. और अपनी बकरियों को भी साथ में ले आए. अब इसके बाद से हम रोज जंगल जाकर उसी अंदाज में चुदाई का मजा लेने लगे थे. तथा करीब 12 महीनों से हम इसी प्रकार चुदाई कर रहे है. इससे हम दोनों में प्यार बहुत बढ़ गया है. और अब तो ऐसा लगता है की हम दोनों एक दुसरे के संग चुदाई के बिना नही रह सकते.
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