Padosan Ki Chudai Story – लंड की प्यासी सुशीला भाभी ने घर बुलाकर मरवाई अपनी चूत
हेल्लो प्यारे मित्रों, आप सभी का स्वागत है आपके फेवरेट ब्लॉग GandiKahaniyan.com के Padosan ki chudai ki kahaniyan के नए एपिसोड में. पेश है आपके सामने एक बार फिर से मुकेश जी द्वारा भेजी गयी Padosan Ki Chudai Story लेकर. दोस्तों यह Padosan ki chudai ki kahani मेरे सामने वाले मकान में रहने वाली सुशीला भाभी के संग की है.
आपको बता दूँ की सुशीला भाभी के पति एक मिस्त्री का काम करते है. और वह उनसे उम्र में भी काफी बड़े है. इसलिए वह दिन भर थककर घर आते है. इसलिए शायद सुशीला भाभी को वो मजा नही दे पाते है जिसके लिए वह उत्सुक रहती है. मुझे तो खुद को ये यकीन करना मुश्किल हो जाता है की इस रामू भैया को सुशीला भाभी जैसी जवान और हॉट लड़की कैसे मिल गयी?
खैर दोस्तों ये तो सब किस्मत की बातें है. लेकिन जो चोदकर मजे दे-दे असली हकदार उस माल का वहीँ होता है. इसी कड़ी में दोस्तों आपको बताऊ की सुशीला भाभी का विवाह आज के 8 बरस पहले रामू भैया से हुआ था. और सुशीला भाभी उस समय केवल 20 बरस की थी. तथा इस दौरान वह एक स्लिम टाइप की लड़की थी. हालाँकि आज भी है तो स्लिम ही लेकिन उनके कुल्हे और मम्मे आज पहले से दोगुना हो गये है.
तथा वह हमारे घर पर जब भी आती है तो मेरे से जरूर बातें करके जाती है. क्योंकि मैं पहले तो उनको मजाक में ही लेता था. लेकिन जब से मैं 18 बरस का हुआ हूँ अब सबकुछ समझने लग गया हूँ. और अब तो मानों दोस्तों की मैं सुशीला भाभी को याद कर करके ही अपनी मुठी मारकर काम चला लेता हूँ. अभी मैं कॉलेज में दाखिला लिया ही हूँ लेकिन आपको सच बताऊ तो कॉलेज में भी कोई ऐसी सेक्सी लड़की नही है जैसी मेरी सुशीला भाभी है.
उसका नंगा बदन देखने के लिए मैं पुरे दिनभर बेताब रहता हूँ. फिर दोस्तों अभी पिछले दिनों होली का त्यौहार आने वाला था और आपको तो पता ही है की सभी के घरों में सफाई का अभियान चालू हो जाता है. अब सुशीला भाभी घर में अकेली थी. चूंकि उनके पतिदेव रामू भैया हमेशा सुबह-सुबह काम पर चले जाते है. इसलिए उन्होंने सोचा की आज सफाई के दौरान कोई भारी चीज उठाने के लिए एक अन्य व्यक्ति तो चाहिए होगा.
इसलिए वह हमारे घर आई और मेरी मम्मी को बोली- आज प्लीज मुकेश जी को मेरे घर भेज दो मेरे को कुछ सफाई करनी है और उनके भैया अभी घर पर है नही इसलिए मेरे से अकेली से बेड, अलमीरा वगेरह नही उठ पाएगी.
इतना सुनकर मेरी भोली-भली माँ ने हाँ कर दी. और मेरे को आवाज लगाई- मुकेश,,,,,मुकेश,,,,,,मुकेश.
मैंने आवाज सुनकर बोला- हाँ मम्मी क्या काम है?
मम्मी- बाहर आ तेरी सुशीला भाभी आई है.
सुशीला भाभी का नाम सुनते ही मैं झट से बाहर निकला और देखा की सच में सुशीला भाभी मेरे घर पर आई हुई थी. और वो मुस्कुराते हुए बोली- मुकेश जी आज आप प्लीज मेरे घर पर मेरे को थोड़ा सामान साइड करवा दोगे? क्योंकि आपके भैया इस समय घर पर नही है.
इतना सुनते ही दोस्तों मेरे मन में लड्डू फुट पड़े और मैंने तुरंत हाँ कर दी. और फिर सुशीला भाभी तथा मैं दोनों उनके घर चले गये. तथा फिर सफाई अभियान में लग गये. हालाँकि मैं गया तो था भारी सामान उठाने के लिए लेकिन वहां पर मेरे को भाभी के साथ काम करना अच्छा लग रहा था. तभी मैंने बोला- आज भैया क्यूँ नही रुके यार आप अकेली परेशान हो गयी होगी?
भाभी- आपके भैया को कहाँ मेरी परवाह है, उनको तो अपने काम से ही फुर्सत नही है.
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मैं- ओह्ह,,, मतलब वो आपका बिलकुल भी ख्याल नही करते ना? आने दो आज भैया को सुनाता हूँ उनको तगड़ी-तगड़ी बातें.
भाभी- मुकेश जी आप तो रहने ही दो उनको कुछ फर्क नही पड़ता है कुछ भी सुनाओ उनको सिर्फ अपने मिस्त्री वाले काम से मतलब है.
मैं- यार मुझे यकीन नही हो रहा है कोई ऐसी खुबसुरत बीवी की भी हेल्प नही कर सकता क्या? अगर उनकी जगह मैं आपका पति होता तो आपके पुरे कामों में हाथ बाटता.
भाभी- आपको इतनी खुबसुरत लगी क्या मैं?
मैं- इसमें क्या शक वाली बात है भाभी, आप इस मौहल्ले में सबसे खुबसुरत लड़की हो.
भाभी- अभी मैं आपको लड़की ही नजर आती हूँ क्या?
मैं- हाँ यार लड़की ही हो अभी महिला जैसी नही दिखती हो.
भाभी- ओह्ह्ह माय गॉड,,,, कितना मजाक करते हो आप. हहहाहा
मैं- मजाक नही सच में भाभी आप अभी बहुत जवान लगती हो. आपको एक सीक्रेट बात बताऊ अगर आप बुरा न मानों तो?
भाभी- बताओ मुकेश जी क्या बात है?
मैं- पहले कसम खाओ की आप बुरा नही मानोगी?
भाभी- अच्छा बाबा नही मानूंगी बुरा,,, बता भी दो अब.
मैं- कैसे बताऊ भाभी मुझे डर लगता है.
भाभी- बता दो मैं किसी से कुछ भी नही कहूँगी.
मैं- अच्छा ठीक है, भाभी मैं है ना आपको याद करके ही अपना काम चलाता हूँ.
इतना सुनते ही भाभी मुस्कुराई और बोली- कैसे देवर जी?
मैं- वैसे ही जैसे सब चलाते है.
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भाभी- फिर भी कैसे तो बताओ तो सही पता तो चले मेरे को कम से कम.
मैं- अरे यार,,,, जब मेरे को कुछ करने की आती है ना तब मैं आपको ही इमेजिन करता हूँ. और फिर हिलाकर आराम लेता हूँ. मुझे बहुत अच्छा फील होता है जब आपको याद करके हिलाता हूँ तो.
भाभी- अच्छा, मेरे को तो पता नही था ये सब,,,, और क्या-क्या करते हो मेरे बारें में?
मैं- और बस आपसे प्यार करने की तम्मना है जो अब पूरी हो नही सकती. क्योंकि आप रामू भैया की बीवी जो ठहरी.
भाभी- यार मुकेश जी आप कितने भरे पड़े हो और एक आपके भैया है जो कितने खाली पड़े है. उनसे कुछ हो नही रहा और एक आप हो की मेरे को याद कर करके अपना माल निकाल रहे हो.
मैं- भाभी आपका मन नही होता क्या करवाने का?
भाभी- बहुत होता है लेकिन मेरे घरवालों को पता नही क्या सुझा की मेरे को इस रामू के साथ रवाना कर दिया. आज मेरी जिन्दगी नर्क सी बन गयी है. ना तो कुछ कर पाते है ना मेरे से प्यार से बात करते है. इतना कहते ही सुशीला भाभी रोने जैसा मुंह बना डाली.
ये सब देख मैंने सुशीला भाभी को अपने सीने से लगा लिया. और अब मैं उनके सर पर हाथ फेरने में लग गया. और साथ में उनकी आँखों से आंसू भी पौंछ रहा था. तभी ऐसी करते-करते बहुत समय गुजर चूका था. और वो अब मेरी बाहों में आ चुकी थी. अब मेरा दोस्तों उनको किस करने का मन हो गया इसलिए मैंने उनके गालों पर एक प्यारा सा किस कर डाला.
मेरे किस करते ही सुशीला भाभी बोली- बाहर मेन गेट खुला ही है पहले उसे बंद करके आओ. ताकि अंदर कोई आ न सकें.
भाभी के मुंह से ये बात सुनकर मेरे में हिम्मत बढ़ गयी. और मैं समझ चूका था की सुशीला भाभी चुदाई के लिए काफी प्यासी है इसलिए अब जल्दी से गेट बंद करके आने में फायदा है. इसलिए मैनी दौड़कर गया मेन गेट को बंद करके जल्दी से भाभी के पास चला आया. और फिर से उनसे प्यार करने लग गया. और हम सफाई अभियान को इस दौरान बंद कर चुके थे.
तथा अब मैं उनके होठों से होठ मिलाकर चूमे जा रहा था. ऐसा मानों की इस दौरान मुझे ऐसा लग रहा था की मैं कोई सपना देख रहा हूँ. क्योंकि मेरे को नही पता था की जिसे याद करके मैं मुठ मारता हूँ. वो लड़की मेरे से चुदने के लिए प्यासी बैठी है.
सुशीला भाभी भी मेरे को पकड़कर जमकर होठ चूमने का मजा लिए जा रही थी. और वो इस दौरान मेरे को ऐसे चूम रही थी जैसे कोई प्यासी लड़की चूम रही हो. मेरे को उनके होठों का रस इतना मीठा लग रहा था की दिल कर रहा था अब बस भाभी के होठों को चूमता ही रहूँ. इसी दौरान अब मैंने एक हाथ उनके बूब्स पर रख दिया.
और फिर मैंने महसूस किया की उनके बूब्स बहुत मोटे और गर्म हो रखे है… शायद वह चुदने के लिए तैयार हो गयी है. इसलिए मैंने अब उनके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया. और जैसे ही मैंने उनके बूब्स को मसलना शुरू किया वो चुदाई के जोश में आकर आहा…अहहहः….अहहहः… मुकेश जी….. अहहहः…. अहाहाहा….अह्हह…. प्लीज ऐसा न करो…. मेरे को कुछ-कुछ हो रहा है….अहः…अहहाह.
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मैं बोला- कुछ-कुछ हो रहा है तो उसका इलाज भी कर दूंगा मेरी जान. मुझे जी भरके अपने बूब्स को मसल लेने दो. आपके बूब्स बहुत मस्त है मेरा मन रुकने को नही मान रहा.
इतना सुनते ही भाभी लेट गयी और अब उन्होंने अपनी साड़ी को जांघों तक ला दिया. और जैसे ही मैंने वो उनके गोरे-गोरे टांग देखे मैंने बूब्स को छोड़ा और अब मैं खुद से भाभी की साड़ी को ऊपर करने में लग गया. और इस दौरान भाभी ने लाल रंग की पेंटी पहन रखी थी. जिसमे से उनका वो बदन खिल रहा था. तथा मैंने नोटिस किया की उनकी चूत के सामने से कुछ गीला-गीला महसूस हो रहा था.
तभी मैंने पूछा- भाभी आपने ये क्या पेशाब कर दी क्या?
भाभी- नही जैसे आपने मुझे प्यार किया है, इस प्यार का ही परिणाम है जो निचे से आ रहा है. प्लीज अब आगे करो कुछ मेरे से बिलकुल नही रहा जा रहा है. मैं मचल चुकी हूँ.
इतना सुनते ही मैंने भाभी की पेंटी खोलने की कोशिश की और उन्होंने अपनी गांड उठाकर पेंटी खुलवा ली. तथा अब मैंने देखा की सुशीला भाभी की चूत एकदम चिकनी और रसीली हो रखी थी. मानों की चूत खुद बोल रही हो… जल्दी से लंड डाल दो.
लेकिन मेरा मन अब उनकी चूत (padosan ki chut) को चाटने का हो रहा था. इसलिए मैं उनके सामने आ गया और अब उनकी चूत को गौर से देखने में लग गया. तथा अब उनकी चूत की पंखुड़ी को फैलाकर अपनी जीभ से चूत का रस पिने लग गया… जैसे ही मैंने अपनी जीभ लगाई भाभी की आहाहाह….अहहाह…अहहह्ह….अहहाह….अहहहः….अहहह्हा….अह्हह… निकल पड़ी. और वो इस दौरान काफी मचल चुकी थी.
करीब 10 मिनट चूत चटवाने के बाद भाभी बोली- अब आप भी अपने लंड के दर्शन करवा ही दो.
इतना सुनते ही मैंने अपनी पेंट खोली और उनके सामने मेरा 6 इंच का लंड खड़ा कर दिया. मेरा लंड देखकर भाभी बोली- ओह्ह…माय…गॉड इतना बड़ा लंड है आपका? इसी लंड की तमन्ना थी मेरे को.
इतना कहकर वो मेरे लंड को कुल्फी की तरह चूमने में लग गयी. और मैं अब फिर से उनके बूब्स को मसल रहा था. करीब 5 मिनट तक मेरे लंड को चूसकर सख्त करके भाभी बोली- अब प्लीज चोद लो मेरे से रहा नही जा रहा है मुकेश जी…. प्लीज.
आपको बताऊ यह मेरा पहली बार सेक्स का अनुभव था तो मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित था. मेरा लन्ड 6 लंबा और 3 मोटा है. मैंने एकदम से अपना लंड भाभी की चूत में डाल दिया. उन्होंने मुझे डांट दिया- इतनी जल्दी कोई डालता है क्या?
वे चीख उठी और कहने लगी- इतना बड़ा है तेरा लन्ड … आराम से डाल कमीने!
और मैं भाभी को पूरी रफ्तार से चोदने लगा. फिर उनको भी बहुत मजा आने लगा, वे सिसकारियां लेने लगी- आह ओह … ओह आह … ओह गॉड … और तेज करो. भाभी ऐसे कहने लगी- आपके भैया का तो बहुत छोटा है. और वे तो अच्छे से चोद भी नही पाते हैं मुझे … जल्दी ही निकल जाता है उनका. उनकी ये बातें सुनकर मेरे में और जोश आने लग गया. और मैं एक ही रफ्तार में सुशीला भाभी को टांग उठाकर चोद रहा था.
मेरे को भी पहली बार चूत मिली थी. इसलिए मेरे से बिलकुल भी रहा नही जा रहा था. और मैं अब चोद भी रहा था साथ में उनके गोरे-गोरे गालों को किस भी कर रहा था. मेरा ये चोदने का अंदाज देखकर भाभी कुछ ही देर में अपनी चूत से पानी छोड़ चुकी थी. और आहा…हहह्हा…आह्हहः….अहहः…अहहाह.. करके एकदम शांत हो गयी.
लेकिन मैं कहाँ रुकने वाला था मैं दनादन चोदे जा रहा था. क्योंकि मेरे को इस दौरान ऐसा लग रहा था की शायद ये चूत मेरे को फिर से नही मिलेगी. इसलिए अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ा डाली और करीब 10-20 और तेज झटकों के बाद मैंने अपने लंड का माल भाभी की चूत में ही छोड़ दिया.
और फिर मैं भी उनके ऊपर ही लेट गया. हम दोनों फिर से अपने सेक्स के अनुभव के बारें में बताने लग गये. तभी भाभी बोली- आज जाकर मेरी ढंग से चुदाई हुई है. वरना आपके भैया की बेटरी तो ज्यादा से ज्यादा 5 मिनट तक ही चल पाती है. और उनका लंड भी आपसे आधा ही है इसलिए मेरी चूत की गहराई में भी नही जा पाता है.
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फिर भाभी ने मेरे को प्यार करना शुरू कर दिया. और बोली- मुकेश जी मेरे को घोड़ी बनकर चुदने में बहुत मजा आता है. क्या हम अब घोड़ी बन कर चुदाई करें?
मैं- हाँ भाभी आपकी इच्छा है मेरे को भी कुछ नया सिखने को मिलेगा.
भाभी- इसका मलतब आपने कभी सेक्स नही किया?
मैं- नही मैंने पहली बार चूत ही आज देखी है.
इतना सुनते ही भाभी जोर-जोर से हंसने में लग गयी…हहहहाह…. और फिर उन्होंने बोला- चलो मैं आपको सिखाती हूँ घोड़ी बनाकर कैसे चोदते है?
इतना कहकर भाभी फर्श पर ही घोड़ी बन गयी. और मैं अब उनके पीछे था. जहाँ अब उनकी चूत से मेरा पहले वाला माल निकल रहा था. तो मैंने पास में रखा एक साफ़ कपड़ा लिया और उनकी चूत को साफ़ करके. फिर से पीछे से उनकी चूत को चूमना शुरू कर दिया.
और अब भाभी फिर से आह…. आह्ह…अहहहः… आह्हह… आह्हा…अहह्हः. करके पागल हुए जा रही थी. उनकी ये कामुक आवाजें सुनकर मेरा लंड भी तुरंत खड़ा हो चला था. इसलिए अब मैंने पीछे से उनकी चूत के छेद पर अपने लंड को सेट किया और एक धक्का मारा तो सुशीला भाभी की चूत में एकदम से लंड चला गया.
और अब वो आह…आह…अहहाह…. करके चुदवा रही थी. और मेरे को बोली प्लीज मेरी कमर को पकड़कर अपने धक्के दो. तो मैंने भी ठीक वैसा ही किया जैसा सुशीला भाभी ने हुकम दिया था. मैं अब उनकी कमर को पकड़कर जोर-जोर से धक्के दिए जा रहा था.
वे जोर से सिसकारियां लेने लगी और तेज तेज चोदने को कहने लगी. इस दौरान वे लगातार आह ओह ओह … आह शशश … और तेज करो … कहने लगी. मैंने उनको लगातार 20 मिनट चोदा. फिर उनकी चूत में जलन सी होने लगी और वे मुझे लंड निकालने के लिए कहने लगी. लेकिन फिर भी मैं उनको चोदने में लगा रहा और 5 मिनट बाद उनकी चूत में ही अपना माल छोड़ दिया.
और मेरा ये घोड़ी वाला राउंड फील करके सुशीला भाभी बोली- कसम से मुकेश जी जिंदगी मैं इतनी खुशी मुझे कभी नहीं हुई. फिर मैंने उनको एक बार और चोदा. भाभी मुझ पर पूरी तरह से फिदा हो गई थी. और मुझे बोली- आप प्लीज मेरे को ऐसे ही चोदने के लिए हमेशा घर आ जाया करो.. आज से मैं आपके लंड की दीवानी बन चुकी हूँ. और प्लीज अब आपको मूठ मारने की कोई जरूरत नही है. आपकी भाभी आपसे चुदवा लेगी.
इसके बाद से दोस्तों करीब 6 महीने हो चले है मैं पड़ोसन की चुदाई का भरपूर मजा लेता हूँ. और रामू भैया को इसके बारें में कोई खबर नही है. क्योंकि वो भाभी से ज्यादा मतलब रखते भी नही है. इसलिए भगवान करें की हमारा ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहे.. और हम ऐसे ही मजे लेते रहे.
ये Padosan ki chudai kahani आप हमारी वेबसाइट gandikahaniyan.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Padosan sex kahani बहुत पसंद आई होगी. अगर आपको मेरी Gandi Kahaniyan पसंद आती है तो आप हमे कमेंट करके बता सकते है. हम आपके लिए ऐसे ही मजेदार कहानियां लेकर आते रहेंगे.